india-news

माधव गाडगिल पैनल और पश्चिमी घाट: पर्यावरण संरक्षण की दिशा में ऐतिहासिक रिपोर्ट

Explore the historic Madhav Gadgil Panel Report on the Western Ghats, outlining its crucial recommendations for environmental protection, ecological balance, and sustainable development in this vital biodiversity hotspot.

annesharoy82803

Published by

माधव गाडगिल पैनल और पश्चिमी घाट: पर्यावरण संरक्षण की दिशा में ऐतिहासिक रिपोर्ट

माधव गाडगिल की अध्यक्षता में गठित पश्चिमी घाट पारिस्थितिकी विशेषज्ञ पैनल (WGEEP) ने भारत के पश्चिमी घाट क्षेत्र के संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए थे। इस समिति का गठन वर्ष 2010 में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा किया गया था। समिति ने वर्ष 2011 में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसमें पश्चिमी घाट को विश्व के सबसे समृद्ध जैव विविधता वाले क्षेत्रों में से एक बताते हुए इसके संरक्षण पर जोर दिया गया।

माधव गाडगिल समिति ने लगभग पूरे पश्चिमी घाट क्षेत्र को पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र (Ecologically Sensitive Area - ESA) घोषित करने की सिफारिश की थी। समिति ने पश्चिमी घाट को तीन श्रेणियों में बांटने और खनन, बड़े बांध, प्रदूषणकारी उद्योगों तथा अनियोजित निर्माण गतिविधियों पर नियंत्रण लगाने का सुझाव दिया था।

Madhav Gadgil People Centred ConservationMadhav Gadgil People Centred Conservation

पश्चिमी घाट महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल सहित छह राज्यों में फैला हुआ है। यह क्षेत्र कई दुर्लभ वनस्पतियों और जीव-जंतुओं का प्राकृतिक आवास है। हालांकि समिति की कई सिफारिशों का स्थानीय विकास और रोजगार के मुद्दों को लेकर विरोध भी हुआ। बाद में कस्तूरीरंगन समिति ने इस विषय पर अलग दृष्टिकोण प्रस्तुत किया।

माधव गाडगिल पैनल की रिपोर्ट आज भी पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन और सतत विकास के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण दस्तावेज मानी जाती है।

👁 61 Views 👍 0 👎 0