26 नवंबर 2025, संविधान दिवस के अवसर पर भारत सरकार ने देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम उठाया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने संसद परिसर में आयोजित विशेष कार्यक्रम में भारतीय संविधान के डिजिटल संस्करण का 9 भारतीय भाषाओं में अनुवाद जारी किया। यह पहल न केवल भाषाई विविधता को सम्मान देती है, बल्कि नागरिकों तक संविधान की पहुँच को और अधिक सरल तथा व्यापक बनाती है।
कौन-कौन सी भाषाएँ शामिल हैं?
अनुवाद निम्न 9 भाषाओं में जारी किए गए:
मलयालम, मराठी, नेपाली, पंजाबी, बोडो, कश्मीरी, तेलुगु, उड़िया (ओड़िया) और असमी।
इनमें विशेष रूप से बोडो और कश्मीरी भाषाओं में संविधान का अनुवाद पहली बार जारी किया गया।
क्यों महत्वपूर्ण है यह पहल?
- संवैधानिक साक्षरता में वृद्धि – अपनी मातृभाषा में संविधान पढ़ने से आम नागरिक अधिकार, कर्तव्य व नीतिगत संरचना को बेहतर समझ सकेंगे।
- भाषाई समावेशन – भारत की बहुभाषी संस्कृति को संवैधानिक स्तर पर स्वीकारना और सम्मान देना इस पहल का मूल उद्देश्य है।
- डिजिटल उपलब्धता – सभी अनुवाद डिजिटल स्वरूप में उपलब्ध करवाए गए हैं, जिससे देशभर में इसकी पहुँच सुलभ और तेज़ हो सके।
- पहली बार व्यापक बहुभाषी अनुवाद – अब तक संविधान प्रमुखतः हिंदी और अंग्रेज़ी में उपलब्ध था, जबकि भारत के विविध क्षेत्रों में रहने वाले नागरिक अपनी स्थानीय भाषाओं में कानूनी ज्ञान से वंचित थे।
- शैक्षणिक उपयोगिता – स्कूल–कॉलेज, प्रशासनिक परीक्षाएँ और विधि शिक्षा में इन भाषाई संस्करणों का उपयोग भविष्य में और बढ़ेगा।
-विभिन्न विश्वविद्यालयों और भाषाई विशेषज्ञ समितियों ने मिलकर यह अनुवाद तैयार किया।
विशेषकर, कश्मीर विश्वविद्यालय ने कश्मीरी भाषा का अनुवाद तैयार किया, जिसे राष्ट्रपति द्वारा सराहा गया।
संविधान का 9 भाषाओं में अनुवाद भारत की भाषाई पहचान, लोकतांत्रिक मूल्यों और जन-केंद्रित शासन के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह कदम नागरिकों को संविधान से सीधे जोड़ने और देश में संवैधानिक जागरूकता बढ़ाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।