कूनो नेशनल पार्क (Kuno National Park), जो मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में स्थित है, वर्तमान में भारत के सबसे चर्चित वन्यजीव गंतव्यों में से एक है। यह पार्क अपनी अनूठी जैव विविधता और महत्वाकांक्षी 'प्रोजेक्ट चीता' के कारण वैश्विक स्तर पर पहचान बना चुका है।
इतिहास और भूगोल
- स्थापना: इसकी स्थापना 1981 में एक वन्यजीव अभ्यारण्य के रूप में की गई थी, जिसे 2018 में राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा दिया गया।
- क्षेत्रफल और नदी: यह लगभग 748 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। इस पार्क का नाम इसके बीच से बहने वाली कूनो नदी के नाम पर रखा गया है, जो चंबल नदी की सहायक नदी है।
- वनस्पति: यहाँ मुख्य रूप से शुष्क पर्णपाती वन (deciduous forests) पाए जाते हैं, जिनमें खैर, सालई और कधाई जैसे पेड़ प्रमुख हैं।
प्रोजेक्ट चीता: एक ऐतिहासिक पहल
भारत में 1952 में विलुप्त घोषित किए गए चीतों को वापस लाने के लिए कूनो को चुना गया।
- शुरुआत: 17 सितंबर 2022 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नामीबिया से लाए गए 8 चीतों को यहाँ छोड़ा।
- विस्तार: इसके बाद दक्षिण अफ्रीका और हाल ही में बोत्सवाना (फरवरी 2026) से भी चीते लाए गए हैं।
- वर्तमान स्थिति: मार्च 2026 तक, कूनो नेशनल पार्क में चीतों की कुल संख्या बढ़कर 45 हो गई है, जिनमें भारत में जन्मे कई शावक भी शामिल हैं।
अन्य वन्यजीव और आकर्षण
चीतों के अलावा, कूनो कई अन्य प्रजातियों का घर है:
- पशु: तेंदुआ, लकड़बग्घा, चीतल, सांभर, नीलगाय, चिंकारा और जंगली सूअर।
- पक्षी और सरीसृप: यहाँ 120 से अधिक पक्षियों की प्रजातियाँ और कूनो नदी में मगरमच्छ व घड़ियाल देखे जा सकते हैं।
पर्यटन और बुकिंग
पर्यटक यहाँ सफारी का आनंद ले सकते हैं। सफारी की बुकिंग मध्य प्रदेश फॉरेस्ट डिपार्टमेंट की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से की जा सकती है। पार्क में प्रवेश के लिए अहेरा गेट (Ahera Gate) का उपयोग किया जाता है।