लुप्तप्राय प्रजातियां (Endangered Species) वे जानवर या पौधे हैंजो अपनी कम जनसंख्यावास स्थल (habitat) के विनाशया बदलते पर्यावरण के कारण विलुप्त होने (extinction) के गंभीर खतरे का सामना कर रहे हैं। IUCN Red List इन्हें 17,300 से अधिक प्रजातियों के साथ लुप्तप्राय के रूप में सूचीबद्ध करता है। प्रमुख उदाहरणों में बाघएशियाई हाथीगैंडाऔर बर्फ़ीला तेंदुआ शामिल हैं।
लुप्तप्राय प्रजातियों के प्रमुख उदाहरण
- पशु: बंगाल टाइगरएशियाई हाथीजावन गैंडाहिम तेंदुआ (Snow Leopard)ऑरंगुटांसऔर रेड पांडा।
- समुद्री जीव: ब्लू व्हेलडॉल्फ़िनऔर कछुए।
- पौधे: मिडपेन परिरक्षित दुर्लभ पौधे और कुछ विशिष्ट प्रकार के देवदार।
विलुप्तप्राय होने के कारण
- आवास का विनाश: शहरीकरणवनों की कटाई और खेती के लिए जंगलों को काटना।
- शिकार और अवैध व्यापार: जानवरों के खालसींग या अंगों के लिए अवैध शिकार।
- जलवायु परिवर्तन: बदलता तापमान जो प्रजातियों के अनुकूल नहीं है।
- प्रदूषण: समुद्र और भूमि में प्रदूषणजो समुद्री जीवों को प्रभावित करता है
संरक्षण और स्थिति
- IUCN: प्रकृति के संरक्षणार्थ अंतर्राष्ट्रीय संघ (IUCN) प्रजातियों को उनके खतरे के स्तर के आधार पर वर्गीकृत करता है।
- ईएसए (ESA): 1973 का लुप्तप्राय प्रजाति अधिनियम (Endangered Species Act) संयुक्त राज्य अमेरिका मेंऔर दुनिया भर में कानूनइन प्रजातियों की रक्षा के लिए काम करते हैं।
- संभावित खतरा: किसी प्रजाति को तब लुप्तप्राय माना जाता है जब उसकी आबादी में 50% से 70% तक की गिरावट आ जाती है।