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Post ID: ODMON1NmIS4857

*केरला की सच्ची स्टोरी* *वीरांगना नगेली कौन??* हम प्रत्येक शनिवार को महिला दिवस के रूप में मनाएंगे और क्रांतिकारी महिलाएं जैसे कि वीरांगना फूलन देवी और वीरांगना नगेली, वीरांगना झलकारी बाई कोरी को नमन करेंगें और उनके जीवन संघर्षों को जन जन तक पहुंचाने की कोशिश करेंगे। *‼️जब हिन्दू धर्म में महिलाओं को स्तन ढकने का भी अधिकार नहीं था इसलिए स्तन ही काट दिया ‼️* नंगेली का नाम केरल के बाहर शायद किसी ने न सुना हो. किसी स्कूल के इतिहास की किताब में उनका ज़िक्र या कोई तस्वीर भी नहीं मिलेगी. लेकिन उनके साहस की मिसाल ऐसी है कि एक बार जानने पर कभी नहीं भूलेंगे, क्योंकि नंगेली ने स्तन ढकने के अधिकार के लिए अपने ही स्तन काट दिए थे. केरल के इतिहास के पन्नों में छिपी ये लगभग सौ से डेढ़ सौ साल पुरानी कहानी उस समय की है जब केरल के बड़े भाग में त्रावणकोर के राजा का शासन था. जातिवाद की जड़ें बहुत गहरी थीं और निचली जातियों की महिलाओं को उनके स्तन न ढकने का आदेश था. उल्लंघन करने पर उन्हें 'ब्रेस्ट टैक्स' यानी 'स्तन कर' देना पड़ता था. डॉ.शीबा केरल के श्री शंकराचार्य संस्कृत विश्वविद्यालय में जेंडर इकॉलॉजी और दलित स्टडीज़ की एसोसिएट प्रोफ़ेसर डॉ. शीबा केएम बताती हैं कि ये वो समय था जब पहनावे के कायदे ऐसे थे कि एक व्यक्ति को देखते ही उसकी जाति की पहचान की जा सकती थी. डॉ. शीबा कहती हैं, "ब्रेस्ट टैक्स का मक़सद जातिवाद के ढांचे को बनाए रखना था. ये एक तरह से एक औरत के निचली जाति से होने की कीमत थी. इस कर को बार-बार अदा कर पाना इन ग़रीब समुदायों के लिए मुमकिन नहीं था." केरल के हिंदुओं में जाति के ढांचे में नायर जाति को शूद्र माना जाता था जिनसे निचले स्तर पर एड़वा और फिर दलित समुदायों को रखा जाता था. दलित समुदाय उस दौर में दलित समुदाय के लोग ज़्यादातर खेतिहर मज़दूर थे और ये कर देना उनके बस के बाहर था. ऐसे में एड़वा और नायर समुदाय की औरतें ही इस कर को देने की थोड़ी क्षमता रखती थीं. डॉ. शीबा के मुताबिक इसके पीछे सोच थी कि अपने से ऊंची जाति के आदमी के सामने औरतों को अपने स्तन नहीं ढकने चाहिए. वो बताती हैं, "ऊंची जाति की औरतों को भी मंदिर में अपने सीने का कपड़ा हटा देना होता था, पर निचली जाति की औरतों के सामने सभी मर्द ऊंची जाति के ही थे. तो उनके पास स्तन ना ढकने के अलावा कोई विकल्प नहीं था." इसी बीच एड़वा जाति की एक महिला, नंगेली ने इस कर को दिए बग़ैर अपने स्तन ढकने का फ़ैसला कर लिया. केरल के चेरथला में अब भी इलाके के बुज़ुर्ग उस जगह का पता बता देते हैं जहां नंगेली रहती थीं. मोहनन नारायण ऑटो चलाने वाले मोहनन नारायण हमें वो जगह दिखाने साथ चल पड़े. उन्होंने बताया, "कर मांगने आए अधिकारी ने जब नंगेली की बात को नहीं माना तो नंगेली ने अपने स्तन ख़ुद काटकर उसके सामने रख दिए." लेकिन इस साहस के बाद ख़ून ज़्यादा बहने से नंगेली की मौत हो गई. बताया जाता है कि नंगेली के दाह संस्कार के दौरान उनके पति ने भी अग्नि में कूदकर अपनी जान दे दी. नंगेली का जन्म स्थान नंगेली की याद में उस जगह का नाम मुलच्छीपुरम यानी 'स्तन का स्थान' रख दिया गया. पर समय के साथ अब वहां से नंगेली का परिवार चला गया है और साथ ही इलाके का नाम भी बदलकर मनोरमा जंक्शन पड़ गया है. बहुत कोशिश के बाद वहां से कुछ किलोमीटर की दूरी पर रह रहे नंगेली के पड़पोते मणियन वेलू का पता मिला. मणियन साइकिल किनारे लगाकर मणियन ने बताया कि नंगेली के परिवार की संतान होने पर उन्हें बहुत गर्व है. उनका कहना था, "उन्होंने अपने लिए नहीं बल्कि सारी औरतों के लिए ये कदम उठाया था जिसका नतीजा ये हुआ कि राजा को ये कर वापस लेना पड़ा." लेकिन इतिहासकार डॉ. शीबा ये भी कहती हैं कि इतिहास की किताबों में नंगेली के बारे में इतनी कम पड़ताल की गई है कि उनके विरोध और कर वापसी में सीधा रिश्ता कायम करना बहुत मुश्किल है. वो कहती हैं, "इतिहास हमेशा पुरुषों की नज़र से लिखा गया है, पिछले दशकों में कुछ कोशिशें शुरू हुई हैं महिलाओं के बारे में जानकारी जुटाने की, शायद उनमें कभी नंगेली की बारी भी आ जाए और हमें उनके साहसी कदम के बारे में विस्तार से और कुछ पता चल पाए."

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Post ID: 2BlJYiQkk11786

मेरा हमेशा से यह मानना रहा है कि दुनिया में ‌जितना बदलाव हमारी पीढ़ी ने देखा है वह ना तो हमसे पहले किसी पीढ़ी ने देखा है और ना ही हमारे बाद किसी पीढ़ी के देखने की संभावना लगती है

हम वह आखिरी पीढ़ी हैं जिसने बैलगाड़ी से लेकर सुपर सोनिक जेट देखें हैं.बैरंग ख़त से लेकर लाइव चैटिंग तक देखा है और असंभव लगने वाली बहुत सी बातों को संभव होता देखा है.

● हम वो आखिरी पीढ़ी हैं

जिन्होंने कई-कई बार मिटटी के घरों में बैठ कर परियों और राजाओं की कहानियां सुनीं, जमीन पर बैठ कर खाना खाया है, प्लेट में चाय पी है।

● हम वो आखिरी लोग हैं…

जिन्होंने बचपन में मोहल्ले के मैदानों में अपने दोस्तों के साथ पम्परागत खेल, गिल्ली-डंडा, लँगड़ी टांग, आइस पाइस, छुपा-छिपी, खो-खो, कबड्डी, कंचे, सितोलिया जैसे खेल खेले हैं।

● हम वो आखिरी पीढ़ी के लोग हैं

जिन्होंने चिमनी , लालटेन, कम या बल्ब की पीली रोशनी में होम वर्क किया है और चादर के अंदर छिपा कर नावेल पढ़े हैं।

● हम उसी पीढ़ी के लोग हैं…

जिन्होंने अपनों के लिए अपने जज़्बात, खतों में आदान प्रदान किये हैं और उन ख़तो के पहुंचने और जवाब के वापस आने में महीनों तक इंतजार किया है।

● हम उस आखिरी पीढ़ी के लोग हैं

जिन्होंने कूलर, एसी या हीटर के बिना ही बचपन गुज़ारा है। और बिजली के बिना भी गुज़ारा किया है।

जो अक्सर अपने छोटे बालों में, सरसों का ज्यादा तेल लगा कर, स्कूल और शादियों में जाया करते थे।

जिन्होंने स्याही वाली दावात या पेन से कॉपी, किताबें, कपडे और हाथ काले, नीले किये है। तख़्ती पर सेठे की क़लम से लिखा है और तख़्ती घोटी है।

जिन्होंने टीचर्स से मार खाई है. और घर में शिकायत करने पर फिर मार खाई है

जो मोहल्ले के बुज़ुर्गों को दूर से देख कर, नुक्कड़ से भाग कर, घर आ जाया करते थे. और समाज के बड़े बूढों की इज़्ज़त डरने की हद तक करते थे।

जिन्होंने अपने स्कूल के सफ़ेद केनवास शूज़ पर, खड़िया का पेस्ट लगा कर चमकाया हैं
काफी समय तक सुबह काला या लाल दंत मंजन या सफेद टूथ पाउडर इस्तेमाल किया है और कभी कभी तो नमक से या लकड़ी के कोयले से दांत साफ किए हैं।

जिन्होंने चांदनी रातों में, रेडियो पर BBC की ख़बरें, विविध भारती, आल इंडिया रेडियो, बिनाका गीत माला और हवा महल जैसे प्रोग्राम सुने हैं।

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Post ID: 5YRa0y1WUa4158

मेरा हमेशा से यह मानना रहा है कि दुनिया में ‌जितना बदलाव हमारी पीढ़ी ने देखा है वह ना तो हमसे पहले किसी पीढ़ी ने देखा है और ना ही हमारे बाद किसी पीढ़ी के देखने की संभावना लगती है

हम वह आखिरी पीढ़ी हैं जिसने बैलगाड़ी से लेकर सुपर सोनिक जेट देखें हैं.बैरंग ख़त से लेकर लाइव चैटिंग तक देखा है और असंभव लगने वाली बहुत सी बातों को संभव होता देखा है.

● हम वो आखिरी पीढ़ी हैं

जिन्होंने कई-कई बार मिटटी के घरों में बैठ कर परियों और राजाओं की कहानियां सुनीं, जमीन पर बैठ कर खाना खाया है, प्लेट में चाय पी है।

● हम वो आखिरी लोग हैं…

जो मोहल्ले के बुज़ुर्गों को दूर से देख कर, नुक्कड़ से भाग कर, घर आ जाया करते थे. और समाज के बड़े बूढों की इज़्ज़त डरने की हद तक करते थे

● हम वो आखिरी पीढ़ी के लोग हैं

जिन्होंने चिमनी , लालटेन, कम या बल्ब की पीली रोशनी में होम वर्क किया है और चादर के अंदर छिपा कर नावेल पढ़े हैं।

● हम उसी पीढ़ी के लोग हैं…

जिन्होंने अपनों के लिए अपने जज़्बात, खतों में आदान प्रदान किये हैं और उन ख़तो के पहुंचने और जवाब के वापस आने में महीनों तक इंतजार किया है।

● हम उस आखिरी पीढ़ी के लोग हैं

जिन्होंने कूलर, एसी या हीटर के बिना ही बचपन गुज़ारा है। और बिजली के बिना भी गुज़ारा किया है।

जो अक्सर अपने छोटे बालों में, सरसों का ज्यादा तेल लगा कर, स्कूल और शादियों में जाया करते थे।

जिन्होंने स्याही वाली दावात या पेन से कॉपी, किताबें, कपडे और हाथ काले, नीले किये है। तख़्ती पर सेठे की क़लम से लिखा है और तख़्ती घोटी है।

जिन्होंने टीचर्स से मार खाई है. और घर में शिकायत करने पर फिर मार खाई है

जिन्होंने गोदरेज सोप की गोल डिबिया से साबुन लगाकर शेव बनाई है जिन्होंने गुड़ की चाय पी है। काफी समय तक सुबह काला या लाल दंत मंजन या सफेद टूथ पाउडर इस्तेमाल किया है और कभी कभी तो नमक से या लकड़ी के कोयले से दांत साफ किए हैं।

जिन्होंने चांदनी रातों में, रेडियो पर BBC की ख़बरें, विविध भारती, आल इंडिया रेडियो, बिनाका गीत माला और हवा महल जैसे ❣️🙏

#यादें #yadein #oldmemories #memories #olddays #olddaysmemories #oldphoto
#Sankalp

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Post ID: DskO1fItV18276

वो वैश्या नहीं थी-💐 

बात उस समय की है जब मैं जिला जामताड़ा मे इंटरमिडियट मे था | मै जब डेली शाम को अपने कोचिंग को जाता तो रोज आते-जाते मुझे एक बूढ़ी भिखारन महिला मिलती जो रेलवे स्टेशन पर भीख माँगती, जिसे मैं डेली देखता था |
हालांकि महिला बुजुर्ग थीं और कपड़े फटे पुराने होते थे मगर देखने मे ऐसा लगता था जैसे जब ये जवान रही होंगी तो बेहद खूबसूरत रही होंगी |

मै जब प्रति दिन रेलवे फाटक पार करके कोचिंग से लौटता तो रोज देखता कि शाम को दो व्यक्ति आकर उस महिला से पैसे ले लेते थे | वह बूढ़ी महिला उन दोनों व्यक्तियों को देखते ही डरने लगती थी |

मैंने सोचा- 'हो सकता है इनका भीख मांगना ही इनका पेशा हो और ये दोनों जो इससे पैसा ले लेते है इनके कोई रिस्तेदार हों |

और हाँ, मुझे कभी-कभी उस भिखारन महिला को देखकर ऐसा महसूस भी होता था कि शायद वह महिला मुझसे कुछ कहना चाह रही हो |

एक दिन मुझसे नही रहा गया | मेरे मन में उस महिला की दुर्दशा देखकर दया उठी और उसके तथा उन दो व्यक्तियों, जो रोज उससे पैसा लेकर चले जाते थे, उन सब के बारे में विस्तार से जानने की जिज्ञासा हुई और एक दिन मै चुपके से उस भिखारन महिला के पीछे-पीछे चल पड़ा, लेकिन यह क्या----------?

मैं चौक गया !
महिला एक रेड लाइट एरिया वाले इलाके में प्रवेश करने लगी और वहां एक कोठे पर चढ़ गई | मेरे मन मे आया और मै सोचने लगा की क्या ये महिला वेश्या है....?
और अगर नही तो वो आखिर वह यहाँ क्यों आयी हैं....?
मुझे अब उस महिला से घृणा होने लगी, लेकिन मैं यहाँ ठहरने वाला कहां था |

दूसरे दिन मैं एक फर्जी कस्टमर बनकर उस बुजुर्ग महिला जिस कमरे मे गयीं थीं उसके पास पहुँचने में सफल हो गया और मैंने जो दृश्य वहां का देखा, उससे मुझे खुद से नफरत होने लगी...मैं क्यों आया ऐसी गन्दी जगह पर....!!

मुझे क्या पड़ी थी... इन सब मे -
बदबूदार कमरे,
कहीं ढोल की थाप और घुंघरुओं की मधुर ताल पर अश्लील नर्तन करती वेश्याएं,
मुंह में पान की गिलौरी दबाए और मसनद पर लेटे ललचाई नजरों से उन वेश्याओं के अंग अंग को निहारते ग्राहक |

पर मैंने देखा वहां वह बूढ़ी महिला नहीं थी |
मैंने दूसरी तरफ नजर घुमाई, तो उस महिला को एक काल कोठरी में बन्द पाया |
उसकी तरह वहाँ और भी कई महिलायें थी |
लगभग 50 से ज्यादा महिलाये होंगी.....
घुप्प अंधेरा, नीचे दरी पर बैठी घुटनों को उठाए और उस पर सिर झुकाए कुछ महिलायें बैठी थीं |

मैंने वहां से लौट जाना ही उचित समझा-

यहां की स्थिति में सुधार मेरे वश की बात नहीं थीं, लेकिन आज मुझे उस बूढ़ी महिला की सच्चाई का पता चल गया था | अगले दिन मैंने छुट्टी ले ली और आज मै फिर स्टेशन गया | स्टेशन पर वह बूढ़ी महिला पहले दिन की तरह ही भीख मांगने के लिए बैठी थी और जमीन पर अपने एल्युमिनियम का कटोरा पिट-पिटकर लोगों का ध्यान आकृष्ट कर रही थी |

मैं पहले तो उसके करीब जाकर बैठा और उसे प्यार से "माँ" के संबोधन से पुकारा |
माँ शब्दों को सुनकर वह अचंभित हो गई और बेचारी फूट-फूट कर रोने लगी |

मैने उसका परिचय पूछा, माँ आप कौन हो ? कहां से आयी हो ? बच्चे और पति कहां हैं...?
वह रोती रही और रो-रोकर उसने जो दास्तान सुनाई,
मेरे रोंगटे खड़े हो गए और इस समाज से मुझे घृणा होने लगी |

उस बूढ़ी भिखारन ने कहा कि -
बेटा हम प्यार मोहब्बत के झांसे मे पड़कर अपने माँ बाप के विरुद्ध जाकर दूसरे से शादी कर के घर से भाग गये थे....जब तक मन नही भरा तब तक इस्तेमाल करता रहा.. और जिस दिन मन भर गया न बाबू , तब हमें धोखे से कोठे पर लाकर बेच दिया....!!

यहां प्रायः जितने भी लड़कियों को तुम देख रहे हो न सब अपने प्यार मोहब्बत के नाम पर विश्वास करके घर से माँ बाप के विरुद्ध जाकर भागी लड़किया हैं...... और बाद मे जब हमें बेच दिया गया तो फिर हमें मजबूर किया जाता है वेश्या बनने के लिए |

ना चाहते हुए भी ग्राहकों को खुश करना पड़ता है | सब नोचते हैं हमें भेड़िए की तरह मानो कितने दिनों से उनकी प्यास बुझी ना हो | जब तक जवानी रहती है बेटा, तब तक हम कोठे की शान रहते हैं और जब शरीर के अंग साथ देना छोड़ने लगते हैं और ग्राहक मिलने बन्द हो जाते हैं, तब मालिक हमें पागल घोषित कर देता है और सड़कों पर, रेलवे स्टेशन पर भीख माँगने के लिए बैठा देते है और डेली उनके भेजे दलाल हमसे पैसे वसूली करते हैं | पैसे नही देने पर या विरोध करने पर मार पीट भी करते हैं | अब बूढ़ी हो चुके हम महिलाओ के पास उतनी शक्ति तो नही होती की हम उनका विरोध कर पायें....
हम बस जिंदा लाश बन उसके इशारे पर सारा काम करते रहते हैं | जब हम भीख माँगने के लायक भी नहीं बचते, तो हमें ये लावारिश सड़क पर ले जाकर फेंक जाते हैं |

यही है हम वेश्याओ की कहानी-
हम भी सोचते हैं की कास हमने अपने माता-पिता के विरुद्ध ना जाकर गलत कदम ना उठाये होते तो हमारा भी एक हँसता खेलता घर-परिवार होता |

हर मोड़ पर हमारी आंखें तलाशती हैं कि कहीं किसी मोड़ पर कोई अपना मिल जाए, जो इस जिल्लत भरी जिंदगी से छुटकारा दिलाए |

#love

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Post ID: 24J_TxvMlC2981

जकात - शरीयत में जकात के बारे में कहा गया है कि ये अल्लाह ताआला (Prophet Muhammad) द्वारा दिया गया वह माल (संपत्ति) है, जिससे उसके बंदे जरूरतमंद लोगों की मदद कर सकें. शरीयत के मुताबिक इस्लाम धर्म को मानने वाले हर मुसलमान को अपनी संपत्ति का 2.5 प्रतिशत हिस्सा दान करना चाहिए. इसी दान को जकात (Zakat)कहते हैं। फि्रोज शाह तुगलक ने शुरू किया था

जाजिया - गैर मूुस्लिम को देने वाला धार्मिक कर था । सर्व प्रथम मुंंहमद बिन कासिम में शुरू किया

खराज - भूमि कर था जो उपज का 1/10 भाग देना होता था

उसर - भूमि कर  गैर मूुस्लिम को

खासम - लुूटी हुई धन पर देना हॉोता था, कब्जा किए हुए धन का 1/5 भाग

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Post ID: r6AFf3XNSq3441

पति की मृत्यु के बाद ही उसकी विधवा को एक कटोरा भांग और धतूरा पिलाकर नशे में मदहोश कर दिया जाता था। जब वह श्मशान की ओर जाती थी, कभी हँसती थी, कभी रोती थी और तो कभी रास्ते में जमीन पर लेटकर ही सोना चाहती थी और यही उसका सहमरण (सती) के लिए जाना था। इसके बाद उसे चिता पर बैठा कर कच्चे बांस की मचिया
बनाकर दबाकर रखा जाता था क्योंकि डर रहता था कि शायद दाह होने वाली नारी दाह की यंत्रणा न सह सके। चिता पर बहुत अधिक राल और घी डालकर इतना अधिक धुआँ कर दिया जाता था कि उस यंत्रणा को देखकर कोई डर न जाए और दुनिया भर के ढोल, करताल और शंख बजाए जाते थे कि कोई उसका चिल्लाना,रोना-धोना,अनुनय-विनय न सुनने पाए। बस यही तो था सहमरण......" सतीप्रथा । सतीप्रथा से छुटकारा दिलाने वाले लोर्ड विलियम बेन्टीक और राजा राममोहन राय को सलाम।

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Post ID: k7WOs9Lv5O5852

06 सितंबर, 2018 को, भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने ऐतिहासिक फैसले में सर्वसम्मति से धारा 377 के उस हिस्से को रद्द कर दिया, जो समलैंगिक यौन संबंधों को अपराध मानता था और कहा कि यह समानता और गरिमा के संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन करता है।

इससे जुड़ी जानकारी के लिए हम मर्डर इन महिम वेब सीरीज सलाह दे सकते है।

Shivani Raghuvanshi का रोल और उनकी कार्य  सभी लड़कों के लिए चिंता का विषय बनाएगी की अभी से ही उनको अच्छी जनसाथी मिलना संभव नही हो रहा है बाद में ऐसे ही प्रिय अति सुंदर कन्या पुरुषो की स्तिथि से हटकर स्त्रियों की ओर आकर्षित होने लगे तो भविष्य में तकलीफ का सामना करना पड़ सकता है। बाकी हम माननीय सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया के फैसले का आदर और सम्मान करते है कि सभी का अपना राइट्स है।

बाकी तो हमारे विजय राज जी और विराज राणा सर है ही सीनियर एक्टर है काफी अच्छा प्रदर्शन रहा। हम बच्चो और बचिए से इतनी उम्मीद कर सकते है और दिशा निर्देश दे सकते है की वह अपने विपरीत मनुष्य से आकर्षण बनाए और समलैंगिक से दूर रहे खास करके स्त्री बच्चे क्योंकि ऐसे ही लडको को मिल नही रही है वैसे में ऐसे होने लगे तो सक्सेस रेट गिर जाती है।

Murder in Mahim webseries 

आपको देख कर कुछ जिक्र करने का दिल चाहता है
Shivani Raghuvanshi - क्या अदा क्या नखरे तेरे पारो, दिल के टुकड़े हो गए हजारों
Ashutosh Rana - भाई का जलवा ही अलग है
विजय राज - बवाल

#MurderInMahimOnJioCinema #MurderInMahim

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Post ID: 6ShS2E7NIX2765

राजिया का प्रेमी याकूब खा आश्वशाला का प्रधान था 1240 ई० में राजिया अल्तुनिया से विवाह कर लेती है पर काबुल क्षेत्र से आते वक्त डाकुओं की गिरोह ने राजिया+ अल्तुनियां की हत्या कर देते है और उनके साथ लाए हुए धन को लूट लेते है।

कहा जाता है कि याकूब खा राजिया से बचपन से ही प्यार करता था वह आश्वशला का प्रधान था और राजिया के साथ सादी करना चाहता था पर राजिया ने जलील किया और सादी के प्रस्ताव को ठुकरा दिया। यह याकूब खा के दिल में गहरा असर पड़ा। हो सकता है की याकूब खा ही डाकू बनकर राजिया की हत्या करवाया हो, क्योंकि कहते है न मेरी नही तो किसी की नही।

दिल्ली के सरदारों को  एक महिला सुलतान बिलकुल ही पसंद नही था हो सकता है की दिल्ली के सरदार या चालीसा दल के सदस्यों के हत्या करवाया हो, राजिया का यह रहस्य मौत का जवाब इतिहास में ही दफन हो गया।

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Post ID: 6ASsjcigJv2012

फीस समय की या अनुभव की? . एक विशाल जहाज का इंजन खराब हो गया। लाख कोशिशों के बावजूद कोई इंजीनियर उसे ठीक नहीं कर सका। फिर किसी ने एक मैकेनिकल इंजीनियर का नाम सुझाया जिसे इस तरह के काम का 30 से अधिक वर्षों का अनुभव था। उसे बुलाया गया। इंजीनियर ने वहां पहुंचकर इंजन का ऊपर से नीचे तक बहुत ध्यान से निरीक्षण किया। सब कुछ देखने के बाद इंजीनियर ने अपना बैग उतारा और उसमें से एक छोटा सा हथौड़ा निकाला। फिर उसने इंजन पर एक जगह हथोड़े से धीरे से खटखटाया। और कहा कि अब इंजन चालू करके देखें। और सब हैरान रह गए जब इंजन फिर से चालू हो गया। इंजन ठीक करके इंजीनियर चला गया। जहाज के मालिक ने जब इंजीनियर से जहाज की मरम्मत करने की फीस पूछी, तो इंजीनियर ने कहा- 20,000 डॉलर। "क्या?!" मालिक चौंका। "आपने लगभग कुछ नहीं किया। मेरे आदमियों ने मुझे बताया था कि तुमने एक हथोड़े से इंजन पर सिर्फ थोड़ा सा खटखटाया था। इतने छोटे काम के लिए इतनी फीस? आप हमें एक विस्तृत बिल बनाकर दें।" इंजीनियर ने बिल बनाकर दे दिया। उसमें लिखा था: हथौड़े से खटखटाया: $2 कहां और कितना खटखटाना है: $19,998 फिर इंजीनियर ने जहाज के मालिक से कहा - अगर मैं किसी काम को 30 मिनट में कर देता हूं तो इसलिए कि मैंने 30 साल यह सीखने में लगा दिए कि उसे 30 मिनट में कैसे किया जाता है। मैंने आपको 30 मिनट नहीं दिए, इतने समय में मेरे 30 वर्षों का अनुभव दिया है। फीस कितना समय लगा उसकी नहीं मेरे अनुभव की है। जहाज का मालिक बहुत शर्मिंदा हुआ और उसने ख़ुशी ख़ुशी इंजीनियर को उसकी फीस दे दी। . तो किसी की विशेषज्ञता और अनुभव की सराहना करें... क्योंकि ये उनके वर्षों के संघर्ष, प्रयोग, मेहनत और आंसुओं का परिणाम हैं। #tutorliv #NOW

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फीस समय की या अनुभव की?
.
एक विशाल जहाज का इंजन खराब हो गया। लाख कोशिशों के बावजूद कोई इंजीनियर उसे ठीक नहीं कर सका। फिर किसी ने एक मैकेनिकल इंजीनियर का नाम सुझाया जिसे इस तरह के काम का 30 से अधिक वर्षों का अनुभव था। उसे बुलाया गया। इंजीनियर ने वहां पहुंचकर इंजन का ऊपर से नीचे तक बहुत ध्यान से निरीक्षण किया। सब कुछ देखने के बाद इंजीनियर ने अपना बैग उतारा और उसमें से एक छोटा सा हथौड़ा निकाला। फिर उसने इंजन पर एक जगह हथोड़े से धीरे से खटखटाया। और कहा कि अब इंजन चालू करके देखें। और सब हैरान रह गए जब इंजन फिर से चालू हो गया। इंजन ठीक करके इंजीनियर चला गया। जहाज के मालिक ने जब इंजीनियर से जहाज की मरम्मत करने की फीस पूछी, तो इंजीनियर ने कहा- 20,000 डॉलर।
"क्या?!" मालिक चौंका। "आपने लगभग कुछ नहीं किया। मेरे आदमियों ने मुझे बताया था कि तुमने एक हथोड़े से इंजन पर सिर्फ थोड़ा सा खटखटाया था। इतने छोटे काम के लिए इतनी फीस? आप हमें एक विस्तृत बिल बनाकर दें।"
इंजीनियर ने बिल बनाकर दे दिया। उसमें लिखा था:
हथौड़े से खटखटाया: $2
कहां और कितना खटखटाना है: $19,998
फिर इंजीनियर ने जहाज के मालिक से कहा - अगर मैं किसी काम को 30 मिनट में कर देता हूं तो इसलिए कि मैंने 30 साल यह सीखने में लगा दिए कि उसे 30 मिनट में कैसे किया जाता है। मैंने आपको 30 मिनट नहीं दिए, इतने समय में मेरे 30 वर्षों का अनुभव दिया है। फीस कितना समय लगा उसकी नहीं मेरे अनुभव की है। जहाज का मालिक बहुत शर्मिंदा हुआ और उसने ख़ुशी ख़ुशी इंजीनियर को उसकी फीस दे दी।
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तो किसी की विशेषज्ञता और अनुभव की सराहना करें... क्योंकि ये उनके वर्षों के संघर्ष, प्रयोग, मेहनत और आंसुओं का परिणाम हैं।

#tutorliv #NOW

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Calcutta High Court clears path for Suvendu Adhikari's meeting in Sandeshkhali on March 10

 

कलकत्ता उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को एक आदेश जारी कर दक्षिण 24-परगना जिला पुलिस को बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी को 10 मार्च को संदेशखली में नज़ात पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र के तहत दक्षिण अकराटोला में एक बैठक आयोजित करने की अनुमति देने को कहा।

हालाँकि, न्यायमूर्ति जय सेनगुप्ता ने कहा कि अधिकारी को बैठक आयोजित करने की अनुमति दी जाएगी
या सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे के बीच रैली।
न्यायाधीश ने आदेश पारित करते हुए कहा, “विपक्षी दल के नेता को कोई भी भड़काऊ बयान देने की अनुमति नहीं दी जाएगी जिससे क्षेत्र की कानून व्यवस्था की स्थिति खराब हो सकती है।”
संदेशखाली में अधिकारी की रैली उस दिन होगी जब सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ब्रिगेड परेड ग्राउंड में अपनी जनार्जन रैली आयोजित करेगी, जहां, बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी के अनुसार, अशांत द्वीप से बड़ी संख्या में लोग आएंगे।
उच्च न्यायालय का आदेश अधिकारी की एक याचिका के बाद आया, जिसमें आरोप लगाया गया था
दक्षिण 24-परगना पुलिस ने अधिकारी को बैठक आयोजित करने से रोकने के लिए ही नज़ात पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र में 144 सीआरपीसी लगाई थी।
अधिकारी की ओर से पेश हुए वकील ने कहा कि तृणमूल पदाधिकारियों को क्षेत्र में प्रवेश करने की अनुमति दी जा रही है, जबकि विपक्षी दलों के नेताओं को वहां जाने से रोका जा रहा है।
वकील ने कहा, “जब विपक्षी दल, विशेष रूप से मेरे मुवक्किल, पुलिस से संपर्क कर रहे हैं, तो वे कह रहे हैं कि उन्हें अनुमति नहीं दी जाएगी क्योंकि क्षेत्र अभी भी सीआरपीसी की धारा 144 के तहत है।”
राज्य सरकार के वकील ने आरोपों का विरोध किया और कहा कि प्रशासन क्षेत्र में और कानून-व्यवस्था की समस्या नहीं चाहता।
“सरकार बार-बार विपक्षी दलों को क्षेत्र में कोई भी राजनीतिक कार्यक्रम आयोजित करने से क्यों रोक रही है? सरकार किसे बचाना चाहती है, ”न्यायाधीश सेनगुप्ता ने आदेश जारी करने से पहले पूछा।

 

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Post ID: M4Fp11yt0E2022

हावड़ा षड्यंत्र केस​:

  • इंस्पेक्टर शमसुल आलम, जो बंगाल पुलिस में उपाधीक्षक और खुफिया अधिकारी थे, की 24 जनवरी 1910 को हत्या कर दी गई थी।
  • 29 जनवरी 1910 को अनुशीलन समिति के 47 भारतीय राष्ट्रवादियों को इस हत्याकांड में गिरफ्तार किया गया और उन पर मुकदमा चलाया गया। बाद में उनमें से 33 को बरी कर दिया गया।
  • जतिंद्रनाथ मुखर्जी और नरेंद्रनाथ बट्टाचार्जी को एक-एक वर्ष के कारावास की सजा सुनाई गई।
  • इस मामले ने अनुशीलन समिति के नेटवर्क और जतिंद्रनाथ मुखर्जी के कार्यों को अंग्रेजों की जांच के दायरे में ला दिया।

लाहौर षड़यंत्र केस​:

  • लाहौर में साइमन कमीशन विरोधी विरोध के दौरान, लाला लाजपत राय को गंभीर लाठियां मिलीं और अंततः उनकी मृत्यु हो गई।
  • इसने एक बार फिर हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन के क्रांतिकारियों को उकसाया।
  • 17 दिसंबर 1928 को, जॉन सॉन्डर्स, सहायक पुलिस अधीक्षक, जो लाहौर में लाठीचार्ज के लिए जिम्मेदार थे, को भगत सिंह और शिवराम राजगुरु ने गोली मार दी थी। चंद्रशेखर आजाद और सुखदेव थापर ने उनका समर्थन किया।

दिल्ली षडयंत्र केस​:

  • इस घटना को दिल्ली-लाहौर षडयंत्र के नाम से भी जाना जाता है।
  • यह बंगाल और पंजाब में भूमिगत भारतीय क्रांतिकारी द्वारा आयोजित किया गया था और भारत के तत्कालीन वायसराय लॉर्ड हार्डिंग की हत्या के लिए रास बिहारी बोस की अध्यक्षता में किया गया था।
  • बसंत कुमार विश्वास, अमीर चंद, और अवध बिहारी को इस दिल्ली षडयंत्र मामले के मुकदमे में दोषी ठहराया गया और उन्हें फांसी दी गई।

अलीपुर षडयंत्र केस

  • अलीपुर बॉम्बे केस ट्रायल मुजफ्फरपुर के जिला न्यायाधीश की हत्या के प्रयास को संदर्भित करता है।
  • अरबिंदो घोष को अलीपुर बम मामले में चित्तरंजस दास ने बचाव किया था।
  • अलीपुर बम कांड की साजिश वर्ष 1908 में हुई थी।
  • इसे मानिकटोला बम साजिश या मुरारीपुकर साजिश के रूप में भी जाना जाता है।

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हमने ऐसी भी क्या खता कर दी जो काबिले माफी नहीं तुमको देखा नहीं है कई दिन से क्या यही सजा काफी नहीं

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नहीं होगी बीपीएससी की दोबारा परीक्षा, हाई कोर्ट में अर्जी खारिज, मुख्य एग्जाम लेने का आदेश


बीपीएससी 70वीं प्रारंभिक परीक्षा को रद्द करके दोबारा आयोजित नहीं किया जाएगा। पटना हाई कोर्ट ने परीक्षा के खिलाफ दायर अभ्यर्थियों की अर्जी को खारिज कर दिया है। अदालत ने मुख्य परीक्षा आयोजित कराने का आदेश दिया है।

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🇮🇳 15 अगस्त – स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं 🇮🇳

आज का दिन सिर्फ़ तिरंगा लहराने का नहीं,
बल्कि उन अनगिनत वीरों को याद करने का है
जिन्होंने अपना आज, हमारे कल के लिए कुर्बान कर दिया।

✨ आइए हम सब मिलकर संकल्प लें
कि अपने देश को और मजबूत, शिक्षित और एकजुट बनाएं।

जय हिंद!
वंदे मातरम्!

#IndependenceDay #15August #India #Freedom #VandeMataram #JaiHind

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रूसी क्रांति

यह क्रांति 1917 में फरवरी और अक्टूबर में दो अलग-अलग समय पर हुई। जारवादी सरकार का अत्याचार रूस के किसानो और मजदूरों के बीच संतोष बढ़ने लगी वही रूस के रुढ़ी वादी चर्च पर राजशाही का नियंत्रण हो गया। ऐसा कहा जाता है कि रोमानोवा राजवंश के जारशाही शासन ने ग्रामीण किसान वर्ग और शहरों में काम करने वाले मजदूरों पर अत्याचार किया। रूसी किसानों का मानना ​​था कि जिस ज़मीन पर वे खेती कर रहे हैं वह उनकी होनी चाहिए, लेकिन उस ज़मीन पर जमींदारों और पादरियों का अधिकार था।

  

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राजा धनानंद की बेटी से चंद्रगुप्त मौर्य को प्यार हो जाता है जब आचार्य चाणक्य को यह पता चलता है तो वह चंद्रगुप्त से कहते है तुम्हें उससे दूर रहना है. चंद्रगुप्त उदास होकर चाणक्य से कहते है आचार्य, अगर भारत का सम्राट बनने के लिए इतना त्याग ना देना पड़ता तो? आचार्य चाणक्य कहते है अगर इतना त्याग नहीं देना पड़ता तो आज हर व्यक्ति भारत का सम्राट बन कर बैठा होता.

राजा धनाानंद की पुत्री दूधधारा थी दुर्धरा/दूधधारा

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Post ID: 1zPvXdStKS2032

तुम शींग मारती गाय सी,
मैं कोने मेे दुबका बेल प्रिये।
मैं सीधा सा पीपल का पेड़ हुं,
तुम उस पर लटकी चुड़ैल प्रिय।।

व्याख्या:
तुम सींग मारती गाय सी - सींग मारती गाय" एक ऐसा रूपक है, जो यह बताता है कि वह बार-बार कष्ट देती है, तंग करती है।
मैं कोने में दुबका बैल प्रिये। - यहाँ प्रेमी स्वयं को एक सहनशील, डरकर छुपा हुआ बैल बता रहा है — जो मार खाकर भी कुछ नहीं कहता। वह प्रेमिका के व्यवहार से आहत है, लेकिन विरोध नहीं करता।
मैं सीधा सा पीपल का पेड़ हूँ - प्रेमी अपने स्वभाव को सरल, स्थिर और बिना छल-कपट के बता रहा है, जैसे पीपल का पेड़ — जो सबको छाया देता है, फिर भी अकेला खड़ा रहता है।
तुम उस पर लटकी चुड़ैल प्रिये।। - यह सबसे तीव्र रूपक है। वह प्रेमिका की तुलना उस चुड़ैल से कर रहा है, जो पीपल के पेड़ पर लटकी होती है — मतलब वह उसके जीवन में डर, पीड़ा और अशांति का कारण बनी है।

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Post ID: Au09v2EpTx0492

सम्यवादी राज्य का अर्थ:
सम्यवादी राज्य (Socialist State) एक ऐसा राज्य है जो समाजवाद के सिद्धांतों पर आधारित होता है। इसका मुख्य उद्देश्य समाज में समानता स्थापित करना, संसाधनों का समान वितरण करना और निजी संपत्ति की सीमाओं को निर्धारित करना है।

सम्यवादी राज्य में निम्नलिखित विशेषताएं होती हैं:

  1. सामाजिक समानता: वर्ग, जाति, और लिंग के आधार पर भेदभाव समाप्त कर सभी को समान अधिकार देना।
  2. संपत्ति पर नियंत्रण: निजी संपत्ति की बजाय सार्वजनिक संपत्ति और संसाधनों का उपयोग समाज के कल्याण के लिए किया जाता है।
  3. श्रमिकों का सशक्तिकरण: श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा और उनका जीवन स्तर ऊंचा करना।
  4. राजनीतिक और आर्थिक लोकतंत्र: हर व्यक्ति को निर्णय लेने और संसाधनों के उपभोग में समान अवसर मिलता है।
  5. कल्याणकारी योजनाएं: शिक्षा, स्वास्थ्य, और रोजगार जैसी बुनियादी सेवाएं सभी के लिए उपलब्ध कराई जाती हैं।

सम्यवादी राज्य का उद्देश्य है कि समाज में कोई भी व्यक्ति आर्थिक या सामाजिक रूप से शोषित न हो।

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Post ID: RHldmZ6Ynk8486

ख्वाहिश नहीं, मुझे
मशहूर होने की,"

       _आप मुझे "पहचानते" हो,_
       _बस इतना ही "काफी" है।_😇

_अच्छे ने अच्छा और_
_बुरे ने बुरा "जाना" मुझे,_

       _जिसकी जितनी "जरूरत" थी_
       _उसने उतना ही "पहचाना "मुझे!_

_जिन्दगी का "फलसफा" भी_
_कितना अजीब है,_

       _"शामें "कटती नहीं और_
 -"साल" गुजरते चले जा रहे हैं!_

_एक अजीब सी_
_'दौड़' है ये जिन्दगी,_

  -"जीत" जाओ तो कई_
-अपने "पीछे छूट" जाते हैं और_

_हार जाओ तो,_
_अपने ही "पीछे छोड़ "जाते हैं!_😥

_बैठ जाता हूँ_
_मिट्टी पे अक्सर,_

       _मुझे अपनी_
       _"औकात" अच्छी लगती है।_

_मैंने समंदर से_
_"सीखा "है जीने का तरीका,_

       _चुपचाप से "बहना "और_
       _अपनी "मौज" में रहना।_

_ऐसा नहीं कि मुझमें_
_कोई "ऐब "नहीं है,_

       _पर सच कहता हूँ_
       _मुझमें कोई "फरेब" नहीं है।_

_जल जाते हैं मेरे "अंदाज" से_,
_मेरे "दुश्मन",_

  -एक मुद्दत से मैंने_
      _न तो "मोहब्बत बदली"_ 
     _और न ही "दोस्त बदले "हैं।_

_एक "घड़ी" खरीदकर_,
_हाथ में क्या बाँध ली,_

       _"वक्त" पीछे ही_
       _पड़ गया मेरे!_😓

_सोचा था घर बनाकर_
_बैठूँगा "सुकून" से,_

 -पर घर की जरूरतों ने_
       _"मुसाफिर" बना डाला मुझे!_

_"सुकून" की बात मत कर-
-बचपन वाला, "इतवार" अब नहीं आता!_😓😥

_जीवन की "भागदौड़" में_
_क्यूँ वक्त के साथ, "रंगत "खो जाती है ?_

 -हँसती-खेलती जिन्दगी भी_
       _आम हो जाती है!_😢

_एक सबेरा था_
_जब "हँसकर "उठते थे हम,_😊

 -और आज कई बार, बिना मुस्कुराए_
       _ही "शाम" हो जाती है!_😓

_कितने "दूर" निकल गए_
_रिश्तों को निभाते-निभाते,_😘

       _खुद को "खो" दिया हमने_
       _अपनों को "पाते-पाते"।_😥

_लोग कहते हैं_
_हम "मुस्कुराते "बहुत हैं,_😊

       _और हम थक गए_,
       _"दर्द छुपाते-छुपाते"!😥😥

_खुश हूँ और सबको_
_"खुश "रखता हूँ,_

       _ *"लापरवाह" हूँ ख़ुद के लिए_*
*-मगर सबकी "परवाह" करता हूँ।_😇🙏*

*_मालूम है_*
*कोई मोल नहीं है "मेरा" फिर भी_*

  *कुछ "अनमोल" लोगों से_*
  *-"रिश्ते" रखता हूँ।*

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