प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना (PM-Surya Sarovar Yojana) वर्ष 2026 की महत्वपूर्ण सरकारी योजनाओं में से एक है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस योजना को 31 जुलाई 2026 को मंजूरी दी। योजना का मुख्य उद्देश्य देश में फ्लोटिंग सोलर फोटोवोल्टिक (Floating Solar PV) परियोजनाओं को बढ़ावा देना और जल निकायों की सतह का उपयोग करके स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन बढ़ाना है।
इस योजना के तहत जलाशयों, झीलों और अन्य उपयुक्त जल निकायों की सतह पर सौर पैनल लगाए जाएंगे। सरकार ने योजना के माध्यम से 5,000 मेगावाट (MW) की फ्लोटिंग सोलर क्षमता विकसित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके लिए कुल ₹5,070 करोड़ के वित्तीय प्रावधान को मंजूरी दी गई है।
फ्लोटिंग सोलर परियोजनाओं का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इनके लिए पारंपरिक सौर परियोजनाओं की तुलना में भूमि की आवश्यकता काफी कम होती है। जल की सतह पर सोलर पैनल स्थापित होने से भूमि संसाधनों पर दबाव कम किया जा सकता है। इसके अलावा, जल की सतह को आंशिक रूप से ढकने से वाष्पीकरण में कमी आने की संभावना रहती है। सोलर पैनलों के नीचे पानी का प्रभाव उनके तापमान को नियंत्रित करने में भी मदद कर सकता है, जिससे बिजली उत्पादन की दक्षता बेहतर हो सकती है।
यह योजना भारत के नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। फ्लोटिंग सोलर ऊर्जा के विस्तार से स्वच्छ बिजली उत्पादन बढ़ाने, जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने और कार्बन उत्सर्जन घटाने में मदद मिल सकती है।
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
- योजना: प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना
- अंग्रेजी नाम: PM-Surya Sarovar Yojana
- मंजूरी: 31 जुलाई 2026
- कुल वित्तीय प्रावधान: ₹5,070 करोड़
- लक्ष्य: 5,000 MW फ्लोटिंग सोलर क्षमता
- मुख्य उद्देश्य: फ्लोटिंग सोलर परियोजनाओं को बढ़ावा देना
- सोलर पैनल: जलाशयों एवं जल निकायों की सतह पर
- क्षेत्र: नवीकरणीय एवं सौर ऊर्जा