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पश्चिमी घाट के इतने बड़े हिस्से को इको-सेंसिटिव एरिया बनाने का प्रस्ताव

A significant proposal aims to designate a large portion of the Western Ghats as an Eco-Sensitive Area (ESA). This initiative seeks to protect its unique biodiversity, rich ecosystems, and crucial environmental services, ensuring long-term conservation and sustainable development in India's vital ecological hotspot.

akashkumar19709

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पश्चिमी घाट के इतने बड़े हिस्से को इको-सेंसिटिव एरिया बनाने का प्रस्ताव

पश्चिमी घाट (Western Ghats) भारत के सबसे महत्वपूर्ण जैव-विविधता वाले क्षेत्रों में से एक है। वर्ष 2026 में पश्चिमी घाट के संरक्षण को लेकर केंद्र सरकार द्वारा इको-सेंसिटिव एरिया (ESA) से संबंधित नया ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया गया। इसका उद्देश्य पश्चिमी घाट के पर्यावरण और जैव-विविधता की रक्षा करना तथा संवेदनशील क्षेत्रों में अनियंत्रित विकास को नियंत्रित करना है।

केंद्र सरकार के नए प्रस्ताव के तहत पश्चिमी घाट के लगभग 56,825.7 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को इको-सेंसिटिव एरिया घोषित करने का प्रस्ताव रखा गया है। यह क्षेत्र छह राज्यों—गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल में फैला हुआ है।

पश्चिमी घाट भारत के पश्चिमी तट के समानांतर फैली पर्वत श्रृंखला है। यह क्षेत्र अनेक दुर्लभ एवं स्थानिक वनस्पतियों और जीव-जंतुओं का आवास है। इसे यूनेस्को विश्व प्राकृतिक विरासत स्थल के रूप में भी मान्यता प्राप्त है। पश्चिमी घाट दक्षिण भारत की कई प्रमुख नदियों के जलग्रहण क्षेत्र के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

ESA घोषित होने के बाद इन क्षेत्रों में खनन, पत्थर खनन, बड़े निर्माण कार्य और अत्यधिक पर्यावरणीय प्रभाव वाली गतिविधियों पर नियंत्रण लगाया जा सकता है। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि पूरे क्षेत्र में सभी मानवीय गतिविधियां पूरी तरह प्रतिबंधित हो जाएंगी। स्थानीय लोगों की आजीविका और आवश्यक विकास गतिविधियों को ध्यान में रखते हुए नियम बनाए जाते हैं।

पश्चिमी घाट का संरक्षण जल सुरक्षा, वन्यजीव संरक्षण, जलवायु संतुलन और जैव-विविधता के लिए महत्वपूर्ण है। इसलिए 2026 का यह प्रस्ताव पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी से जुड़ा महत्वपूर्ण Current Affairs है।

परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

  • क्षेत्र: पश्चिमी घाट
  • प्रस्तावित दर्जा: Eco-Sensitive Area (ESA)
  • प्रस्तावित क्षेत्र: 56,825.7 वर्ग किमी
  • राज्य: गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल
  • मुख्य उद्देश्य: पर्यावरण एवं जैव-विविधता का संरक्षण
  • महत्व: पश्चिमी घाट एक प्रमुख जैव-विविधता हॉटस्पॉट है।
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