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राज्यसभा की अध्यक्षता ऐसे व्यक्ति द्वारा की जाती है, जो उस सदन का सदस्य नहीं होता। ये आपको भी जानना चाहिए

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akashkumar19709

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राज्यसभा की अध्यक्षता ऐसे व्यक्ति द्वारा की जाती है, जो उस सदन का सदस्य नहीं होता। ये आपको भी जानना चाहिए

किताब में पढ़ रहे थे तो एक क्वेश्चन आया - राज्यसभा की अध्यक्षता ऐसे व्यक्ति द्वारा की जाती है, जो उस सदन का सदस्य नहीं होता।

अब ये समझना बड़ा मुश्किल हो रहा है, हालांकि इसका आंसर राज्यसभा है। मुझे लगा आपको भी समझना चाहिए तो चलिए समझते हैं

🧩 “राज्यसभा की राह — विधानसभा से गुजरकर जाती है,पर वहाँ जनता नहीं, विधायक वोट डालते हैं।”

Q. सदन अध्यक्ष क्या वह उसी सदन का सदस्य है?

  • लोकसभा स्पीकर - ✅ हाँ, लोकसभा का सदस्य
  • राज्यसभा उपराष्ट्रपति - ❌ नहीं, सदस्य नहीं
  • विधानसभा (राज्य) स्पीकर - ✅ हाँ
  • विधान परिषद (राज्य) सभापति (Chairman) - ❌नहीं, यानी राज्यपाल द्वारा नियुक्त व्यक्ति नहीं — यहाँ भिन्नता हो सकती है


👉 राज्यसभा का अध्यक्ष — भारत का उपराष्ट्रपति (Vice President) होता है। लेकिन ध्यान दो 👇
उपराष्ट्रपति राज्यसभा का सदस्य नहीं होता,
फिर भी वह उसकी अध्यक्षता करता है।
❌ राज्यसभा = अध्यक्ष उस सदन का सदस्य नहीं होता।

राज्यसभा के सदस्यों का चुनाव कैसे होता है

हाँ, राज्यसभा के सदस्य सीधे जनता नहीं चुनती।
बल्कि — 👉 राज्य के विधायक (MLA) ही राज्यसभा के सदस्यों को चुनते हैं

  • 🔹 मतलब क्या हुआ? - हर राज्य की विधानसभा (State Legislative Assembly) होती है।उस राज्य के जितने विधायक होते हैं,वो लोग राज्यसभा के चुनाव में वोट डालते हैं।इस तरह वे अपने राज्य का प्रतिनिधि राज्यसभा में भेजते हैं।
  • 🔹 उदाहरण: - मान लीजिए — बिहार में 5 राज्यसभा सीटें खाली हैं।तो बिहार विधानसभा के सारे MLA मिलकर वोट डालेंगे,और जो उम्मीदवार सबसे ज़्यादा वोटों से चुने जाएंगे, वे राज्यसभा सदस्य (Member of Rajya Sabha) बनेंगे।
  • 🔹 राष्ट्रपति द्वारा नामित सदस्य - इसके अलावा —12 सदस्य राष्ट्रपति खुद नामित (appoint) करते हैं(जो कला, साहित्य, विज्ञान, खेल आदि में योगदान देते हैं)।उन्हें चुनाव नहीं लड़ना पड़ता।
“राज्यसभा में जनता नहीं, विधायक चुनते हैं सदस्य।”


मतलब एक MLA अपने कार्यकाल में रहते हुए राज्यसभा का सदस्य नहीं हो सकता किसी भी स्टेट में।

  • भारतीय संविधान के अनुसार —> कोई व्यक्ति एक साथ दो विधायी सदनों का सदस्य नहीं हो सकता।
  • राज्य विधानसभा (MLA) का सदस्य है,और राज्यसभा का सदस्य भी चुना जाता है, तो उसे एक पद छोड़ना पड़ता है।
  • राज्यसभा की कुर्सी पाओ, तो विधानसभा की कुर्सी छोड़नी ही पड़ेगी।” 🪑⚖️


मैं इसे थोड़ा सटीक और step-by-step करके समझा देता हूँ ताकि एकदम crystal clear हो जाए 👇

🏛️ मान लीजिए —

  • बिहार में विधानसभा की सीटें हैं = 100 MLA
  • और राज्यसभा की सीटें हैं = 40

अब देखते हैं कि ये चुनाव कैसे होते हैं 👇

🔹 1. कौन वोट डालता है?

👉 केवल विधानसभा के वर्तमान विधायक (MLA)
यानी ये 100 MLA ही वोट डालेंगे।
जनता या MP वोट नहीं डालते।

🔹 2. कौन उम्मीदवार बन सकता है?

✅ कोई भी व्यक्ति जो—

  • भारतीय नागरिक हो,
  • 30 वर्ष से अधिक उम्र का हो,
  • किसी गंभीर अपराध में दोषी न हो,

वह राज्यसभा का उम्मीदवार बन सकता है।⚙️ यानी:

  • वो वर्तमान MLA हो सकता है,
  • या पूर्व MLA / पूर्व MP भी हो सकता है,
  • या कोई गैर-सांसद व्यक्ति भी (जैसे बिज़नेसमैन, प्रोफेसर, समाजसेवी आदि)।

👉 ज़रूरी नहीं कि उम्मीदवार MLA ही हो।

🔹 3. उम्मीदवार कौन खड़ा करता है?

हर राजनीतिक पार्टी (जैसे RJD, JDU, BJP, INC आदि)
अपने-अपने उम्मीदवार (nominees) खड़े करती है।हो सकता है कि —
राज्यसभा की 40 सीटों के लिए
50 या 60 उम्मीदवार नामांकन कर दें।

🔹 4. वोटिंग कैसे होती है?

वोटिंग होती है —
🗳️ अनुपातिक प्रतिनिधित्व (Proportional Representation)
और
🔢 एकल हस्तांतरणीय मत प्रणाली (Single Transferable Vote System) से।इसका मतलब:

  • हर MLA के पास एक ही वोट होता है,
  • लेकिन वह अपनी पहली, दूसरी, तीसरी पसंद के उम्मीदवार को रैंक करता है,
  • फिर वोटों की गिनती क्रम से होती है — जो तय संख्या का वोट हासिल कर लेता है, वही जीतता है।


🔹 5. जो जीतते हैं —

वो राज्यसभा के सदस्य (Member of Rajya Sabha) बन जाते हैं
और दिल्ली की संसद में जाकर अपने राज्य का प्रतिनिधित्व करते हैं।अगर कोई उम्मीदवार MLA था,
तो उसे अपनी MLA सीट छोड़नी पड़ती है
(क्योंकि एक व्यक्ति दोनों सदनों में नहीं रह सकता)।

“राज्यसभा की राह — जाती विधानसभा से गुजरकर।” 😄


यदि कोई व्यक्ति भारत के उपराष्ट्रपति के रूप में चुने जाते हैं, तो उन्हें राज्यसभा के सभापति के रूप में भी कार्य करना पड़ता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि भारत के उपराष्ट्रपति राज्यसभा के पदेन अध्यक्ष होते हैं। उन्हें अपने पहले पद से इस्तीफा देना होता है ताकि वे उपराष्ट्रपति के कर्तव्यों का पूरी तरह से निर्वहन कर सकें।

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