प्रोजेक्ट चीता (Project Cheetah) भारत सरकार की एक महत्वाकांक्षी पहल हैजिसके तहत 17 सितंबर 2022 को नामीबिया से लाए गए 8 चीतों को मध्य प्रदेश के कुनो नेशनल पार्क में छोड़ा गया। इसका उद्देश्य 1952 में विलुप्त घोषित किए गए चीतों को भारत में फिर से बसाना और घास के मैदानों के पारिस्थितिक तंत्र को पुनर्जीवित करना है। यह विश्व का पहला अंतरमहाद्वीपीय स्थानांतरण है।
प्रोजेक्ट चीता: एक अवलोकन
- शुरुआत: 17 सितंबर 2022 को प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा।
- स्थान: मध्य प्रदेश का कुनो नेशनल पार्क (Kuno National Park)।
- उद्देश्य: भारत में चीतों को फिर से बसाना (Reintroduction)घास के मैदानों की पारिस्थितिकी को ठीक करनाऔर जैव विविधता को बढ़ावा देना।
- चीतों का स्रोत: नामीबिया (8 चीते) और दक्षिण अफ्रीका (12 चीते) से अफ्रीकी चीते लाए गए।
- वर्तमान स्थिति: दिसंबर 2025 तककुनो और गांधीसागर में चीतों की संख्या बढ़कर 32 के पार पहुँच गई हैजिसमें भारत में जन्मे शावक भी शामिल हैं।
परियोजना के मुख्य उद्देश्य और महत्व
- पारिस्थितिक संतुलन: चीता एक प्रमुख शिकारी (Top Predator) हैजो घास के मैदानों और खुले जंगलों की खाद्य श्रृंखला को संतुलित करता है।
- विलुप्त प्रजाति की वापसी: 1952 में भारत में चीतों के विलुप्त होने की आधिकारिक घोषणा के बादयह भारत के वन्यजीव इतिहास में एक बड़ा कदम है।
- संरक्षण और पर्यटन: यह परियोजना न केवल चीतों के वैश्विक संरक्षण में योगदान देती हैबल्कि स्थानीय पर्यटन को भी बढ़ावा देती हैजिससे रोजगार के अवसर बढ़ते हैं।
प्रोजेक्ट चीता भारत के प्रकृति संरक्षण प्रयासों में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है। प्रारंभिक कठिनाइयों के बावजूदयह परियोजना विलुप्त प्रजातियों को उनके प्राकृतिक आवास में वापस लाने की दिशा में एक साहसी और सफल पहल साबित हो रही है।