बिहार लंबे समय से कालाजार (Visceral Leishmaniasis) बीमारी से प्रभावित राज्यों में शामिल रहा है। राज्य सरकार ने वर्ष 2027 तक कालाजार मुक्त बिहार बनाने और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से उन्मूलन प्रमाणन प्राप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
कालाजार एक परजीवी जनित बीमारी है, जो संक्रमित बालू मक्खी (Sand Fly) के काटने से फैलती है। यह बीमारी मुख्य रूप से बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में पाई जाती रही है। भारत सरकार ने कालाजार उन्मूलन के लिए राष्ट्रीय स्तर पर कई कार्यक्रम चलाए हैं।
भारत ने वर्ष 2023 तक कालाजार उन्मूलन के निर्धारित मानकों को प्राप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की। वहीं WHO ने वैश्विक स्तर पर उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोगों के उन्मूलन के लिए वर्ष 2030 का लक्ष्य रखा है।
बिहार सरकार द्वारा प्रभावित जिलों में दवा वितरण, रोगियों की पहचान, निगरानी व्यवस्था, कीटनाशक छिड़काव और स्वास्थ्य जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। राज्य का लक्ष्य वर्ष 2027 तक बीमारी को सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या के स्तर से नीचे लाना है।
इसके अलावा भारत सरकार ने टीबी मुक्त भारत अभियान के लिए 2025, मलेरिया उन्मूलन के लिए 2030, हेपेटाइटिस और एड्स नियंत्रण के लिए 2030 जैसे लक्ष्य निर्धारित किए हैं। कालाजार मुक्त बिहार इसी व्यापक स्वास्थ्य सुरक्षा अभियान का हिस्सा है।