महामंदी (The Great Depression) – 1929 से 1939
सन् 1920 के दशक में अमेरिका एक सपनों का देश लग रहा था। हर जगह कारखाने चल रहे थे, नई-नई मशीनें बन रही थीं, शेयर बाजार चढ़ता ही जा रहा था। लोग सोचते थे – “अब तो अमीरी का दौर हमेशा रहेगा।”लेकिन, असली तस्वीर कुछ और थी।
लोग बैंकों से कर्ज़ लेकर शेयर खरीद रहे थे, बिना यह सोचे कि इन कंपनियों की असली कीमत क्या है। खेतों में अनाज खूब पैदा हो रहा था, पर उतने खरीदार नहीं थे। कारखानों से सामान निकल रहा था, पर बाज़ार में मांग कम थी।फिर आया 29 अक्टूबर 1929 – जिसे बाद में "Black Tuesday" कहा गया।
अचानक शेयर बाजार धड़ाम से गिर गया। लाखों लोग एक ही दिन में कंगाल हो गए। बैंक बंद होने लगे। जिनके पास नौकरी थी, वे भी बेरोज़गार हो गए। अमेरिका में तो हालात इतने बुरे हो गए कि लोग सूप किचन (मुफ़्त खाने की लाइन) में खड़े होकर रोटी लेने लगे।धीरे-धीरे यह संकट पूरे विश्व में फैल गया।
यूरोप में कारखाने बंद हुए, एशिया और लैटिन अमेरिका में व्यापार ठप हो गया। भारत में भी इसका असर हुआ – कपास, जूट, चाय जैसी चीज़ों का निर्यात घटा, किसानों की आमदनी कम हो गई और कर्ज़ का बोझ बढ़ गया।इन हालात को सुधारने के लिए 1933 में अमेरिका के राष्ट्रपति फ्रैंकलिन डी. रूज़वेल्ट ने "न्यू डील नीति" शुरू की – सरकारी कामों में लोगों को नौकरी, बैंकिंग सुधार, और सामाजिक सुरक्षा जैसे कदम उठाए गए। धीरे-धीरे हालात सुधरने लगे, लेकिन पूरी दुनिया को इस आर्थिक तूफ़ान से उबरने में कई साल लग गए।
सीख:
The Great Depression ने दुनिया को सिखाया कि अर्थव्यवस्था को संतुलित रखना, बैंकिंग को मज़बूत करना और व्यापार में संतुलन बनाए रखना कितना ज़रूरी है।