मौर्य साम्राज्य प्राचीन भारत का वह काल था जिसने शासन, प्रशासन और आर्थिक व्यवस्था को एक नई दिशा दी। इसी काल में पंचमार्कित सिक्के (Punch-Marked Coins) व्यापक रूप से प्रचलित थे। ये सिक्के चाँदी की छोटी-छोटी पट्टियों पर विभिन्न प्रतीकों की कई अलग-अलग मुहरें लगाकर बनाए जाते थे, जिनमें प्रत्येक मुहर प्रशासनिक प्राधिकरण का संकेत होती थी।
इन सिक्कों पर “पंच-मार्क” यानी पाँच या उससे अधिक चिह्न पाए जाते थे—जैसे सूर्य, बैल, वृक्ष, चक्र, पर्वत, और ज्यामितीय आकृतियाँ। ये प्रतीक न केवल आर्थिक प्रामाणिकता के प्रमाण थे, बल्कि मौर्य शासन की व्यापक राजस्व प्रणाली और व्यापारिक नियंत्रण को भी दर्शाते थे।
मौर्यकालीन पंचमार्कित सिक्कों ने उपमहाद्वीप में व्यापार को एकरूप बनाया तथा मुद्रा प्रणाली को स्थिरता प्रदान की। आज ये सिक्के न केवल भारत की प्राचीन अर्थव्यवस्था को समझने में सहायक हैं, बल्कि उस समय की प्रशासनिक दक्षता और तकनीक का भी सजीव प्रमाण प्रस्तुत करते हैं।