सातवाहन साम्राज्य (पहली शताब्दी ईसा पूर्व से तीसरी शताब्दी ईस्वी) भारतीय उपमहाद्वीप का एक महत्वपूर्ण वंश था, जिसने दक्षिण और मध्य भारत की संस्कृति, व्यापार और अर्थव्यवस्था को उन्नत किया। इसी काल में शीशे (Glass) के सिक्के एक अनोखी और दुर्लभ मुद्रा के रूप में प्रचलित मिले हैं।
ये शीशे के सिक्के सामान्य धातु मुद्राओं की तुलना में हल्के होते थे और अधिकतर नीले, हरे या पारदर्शी रंग के पाए गए हैं। इन पर कभी-कभी प्रतीकात्मक चिह्न, अक्षर या सरल मुद्रांक भी मिलते हैं। माना जाता है कि इन सिक्कों का उपयोग सीमित क्षेत्रों में, संभवतः स्थानीय लेन-देन, धार्मिक दान या स्मारक-प्रकार की मुद्राओं के रूप में किया जाता था।
सातवाहन शासन ने व्यापार और शिल्पकला को विशेष प्रोत्साहन दिया, और यही कारण है कि कांच उत्पादन तकनीक विकसित हुई। शीशे के सिक्के इस तकनीकी कौशल और स्थानीय आर्थिक प्रयोगों का महत्वपूर्ण प्रमाण हैं। आज ये सिक्के पुरातत्वविदों के लिए अत्यंत मूल्यवान हैं, क्योंकि ये न केवल दुर्लभ हैं बल्कि उस समय की कलात्मक और औद्योगिक प्रगति को भी उजागर करते हैं।