मौर्य साम्राज्य (चौथी–दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व) प्राचीन भारत का पहला विशाल और सुव्यवस्थित साम्राज्य था। इस साम्राज्य की आर्थिक व्यवस्था अत्यंत उन्नत थी, जिसका प्रमाण है—आहत सिक्के। आहत सिक्के वे सिक्के थे जिन्हें धातु की चाँदी की पट्टियों पर विभिन्न प्रतीक मुहरों के द्वारा प्रहार (striking) करके बनाया जाता था।
इन आहत सिक्कों की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि उन पर एक से अधिक चिह्नों की मुहरें होती थीं। इनमें सूर्य, पहिया, पर्वत, वृक्ष, बैल, हाथी और ज्यामितीय आकृतियाँ प्रमुख थीं। ये चिह्न न केवल आर्थिक लेन-देन के लिए प्रमाण थे, बल्कि प्रशासनिक नियंत्रण और व्यापारिक प्रामाणिकता का संकेत भी देते थे।
मौर्यकाल में आहत सिक्के पूरे उपमहाद्वीप में प्रचलित थे और लंबी दूरी तक होने वाले व्यापार को सुदृढ़ बनाते थे। आज ये सिक्के भारतीय मुद्राविज्ञान और इतिहास के अध्ययन में अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं, क्योंकि ये तत्कालीन आर्थिक समृद्धि और शासन व्यवस्था की झलक प्रस्तुत करते हैं।